गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010
हमारा क्या कसूर
मैं अक्सर यह सोचती हूँ की क्या लड़कियां हमेशा ही दुःख तकलीफें झेलती रहेगी क्या कभी उन्हें इन तकलीफों से मुक्ति नहीं मिलेगी , आखिर कब तक इन्हें रोंदा जायेगा बीते दिनों ऐसी कई घटनाएँ हमारे समक्ष प्रस्तुत हुई है की अंदाजा लगाया जा सकता है , की कितनी मासूमों को हवस का शिकार बना लिया जाता है , और डरा धमकाकर उनका मुंह बंद करवा दिया जाता है कोई ऐसा दिन नहीं जाता जब की समाचार पत्रों और टीवी की ख़बरों में लड़कियों के बेआबरू होने की ख़बरें न हो। आखिर कब तक इनको हैवानों की भेंट चढ़ना होगा,और कब इनके साथ इंसाफ होगा। आये दिन ऐसी कितनी ही मासूम इन राक्षसों का निवाला बन जाती है और सुरक्षा की गुहार भी किससे लगायी जाए जब सुरक्षा की आड़ में ही अपराध होता है। कभी गोवा में नौ साल की रुसी बच्ची के साथ बलात्कार होता है तो कहीं किसी और बच्ची को बेआबरू किया जाता है। लेकिन सवाल यह उठता है की क्या अब हमारे भारत देश में इन मासूमों से उनका बचपन भी छीन लिया जायेगा ,जिस देश में कन्या को देवी की तरह पूजा जाता हो वहां ऐसा घिनोना कृत्य होगा इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। नतीजा निकलता है तो केवल एक की आये दिन लड़कियां आत्मदाह कर लेती हैं। इन घटनाओं के खिलाफ़ आवाजें तो कई उठती हैं लेकिन इस पर उचित कारवाही कभी नहीं हटी है और वक़्त बीतने के साथ उन केसों को फाइलों में बंद कर दिया जाता है जिस आँगन में कभी हँसी ठिठोली गूंजती हों और वही आँगन जब सुना हो जाये तो उस बेटी के परिवार वालों पर क्या बीतती है इसका शायद हम आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते। आज के इस क्रूर समाज में केवल बेटियों को ही निशाना बनाया जाता है,फिर चाहे वो भ्रूण हत्या हो या फिर बलात्कार की शिकार कोई मासूम आखिर इसका क्या जवाब है की इन मासूमों को इन्साफ मिलेगा ही। आज हर लड़की के मन में यही पुकार है की कब तक उनका शोषण होता रहेगा, कब तक ?
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AApne apne prfile me likha hai `I m very emotional person` jo aapki lekhni me saaf dikhta hai... jis problem ke bare me aapne likha hai.. aapko nahi lagta ki kuchh had tak uske liye ladkiyan bhi zimmedar hain..??!!
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